Tuesday, November 8, 2016

है ज़िन्दगी नाम इसी का कि
घरों की खिड़कियों पर
झालड़ अब भी थे पटे हुए,
और चिराग़ जो थे घर के
यूँही चुपके से निकल गए!

चिराग राैशन रहे
हमसब की दुआ है
आप जहॉं गये
जग राेशन हुआ है.
ऐसे देदीप्यमान काे
घर में राेकें ऐसे हम नहीं
जहाँ जगमगाये घर अंधेरा भी रहे
ताे काेई गम नहीं

चीनी के बहिष्कार में शरीर ने पूरा साथ दिया.
ब्लडशुगर फास्टिंग में 210 आैर बाद में 339 कर दिया.
पहले लगा कि अब जीवन का अब खाक मजा आयेगा.
चीनी तेरा बिन सब निस्वाद और सूना हाे जायेगा.
तभी हिन्दी चीनी भाई भाई का सिला याद आया.
फिर मेरा जी जरा नहीं घबराया.
अब जीवन स्वीटी की बजाय नमकीन हाे गया हैा
जीवन ताे उस बेवफा चीनी का गमगीन हाे गया है.